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mahabharat 3.239.21: हमारी ओर से कोई नीच व्यवहार नहीं होगा। हम उस स्थान पर नहीं जाएँगे जहाँ पाण्डव निवास करते हैं ॥21॥   |   mahabharat अध्याय 3.239: कर्ण आदिके द्वारा द्वैतवनमें जानेका प्रस्ताव, राजा धृतराष्ट्रकी अस्वीकृति, शकुनिका समझाना, धृतराष्ट्रका अनुमति देना तथा दुर्योधनका प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 239: कर्ण आदिके द्वारा द्वैतवनमें जानेका प्रस्ताव, राजा धृतराष्ट्रकी अस्वीकृति, शकुनिका समझाना, धृतराष्ट्रका अनुमति देना तथा दुर्योधनका प्रस्थान  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.239.21 
न चानार्यसमाचार: कश्चित् तत्र भविष्यति।
न च तत्र गमिष्यामो यत्र तेषां प्रतिश्रय:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
हमारी ओर से कोई नीच व्यवहार नहीं होगा। हम उस स्थान पर नहीं जाएँगे जहाँ पाण्डव निवास करते हैं ॥21॥
 
There will be no mean behaviour from our side. We will not go to the place where the Pandavas reside. ॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)