श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 239: कर्ण आदिके द्वारा द्वैतवनमें जानेका प्रस्ताव, राजा धृतराष्ट्रकी अस्वीकृति, शकुनिका समझाना, धृतराष्ट्रका अनुमति देना तथा दुर्योधनका प्रस्थान  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.239.18 
शकुनिरुवाच
धर्मज्ञ: पाण्डवो ज्येष्ठ: प्रतिज्ञातं च संसदि।
तेन द्वादश वर्षाणि वस्तव्यानीति भारत॥ १८॥
 
 
अनुवाद
शकुनि ने कहा- भरत! ज्येष्ठ पाण्डव युधिष्ठिर धर्मात्मा हैं। उन्होंने प्रजा के समक्ष प्रतिज्ञा की है कि 'हमें बारह वर्ष तक वन में रहना है।'॥18॥
 
Shakuni said- Bhaarat! The eldest Pandava Yudhishthira is a virtuous person. He has pledged in the presence of the people that 'we have to live in the forest for twelve years'.॥ 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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