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mahabharat 3.239.16: अथवा यह भी संभव है कि आपके कुछ सैनिक युधिष्ठिर का अपमान कर दें और आपके द्वारा अनजाने में किया गया यह अपराध आपके लिए हानिकारक सिद्ध हो ॥16॥   |   mahabharat अध्याय 3.239: कर्ण आदिके द्वारा द्वैतवनमें जानेका प्रस्ताव, राजा धृतराष्ट्रकी अस्वीकृति, शकुनिका समझाना, धृतराष्ट्रका अनुमति देना तथा दुर्योधनका प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 239: कर्ण आदिके द्वारा द्वैतवनमें जानेका प्रस्ताव, राजा धृतराष्ट्रकी अस्वीकृति, शकुनिका समझाना, धृतराष्ट्रका अनुमति देना तथा दुर्योधनका प्रस्थान  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.239.16 
अथवा सैनिका: केचिदपकुर्युर्युधिष्ठिरम्।
तदबुद्धिकृतं कर्म दोषमुत्पादयेच्च व:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
अथवा यह भी संभव है कि आपके कुछ सैनिक युधिष्ठिर का अपमान कर दें और आपके द्वारा अनजाने में किया गया यह अपराध आपके लिए हानिकारक सिद्ध हो ॥16॥
 
Or it is also possible that some of your soldiers may insult Yudhishthira and this offence committed by you unknowingly may prove harmful for you.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)