Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.239.15: अथवा यदि तुम मेरी बात मानकर अपने को संयमित कर सको और सावधानी के साथ वहाँ रह सको, तो भी वनवास के कारण दुःखी पाण्डवों के बीच यह मानकर रहना तुम्हारे लिए दुःखदायी होगा कि ये लोग सत्यवादी होने के कारण हमारा कुछ नहीं बिगाड़ेंगे॥15॥ | mahabharat अध्याय 3.239: कर्ण आदिके द्वारा द्वैतवनमें जानेका प्रस्ताव, राजा धृतराष्ट्रकी अस्वीकृति, शकुनिका समझाना, धृतराष्ट्रका अनुमति देना तथा दुर्योधनका प्रस्थान । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अथवा यदि तुम मेरी बात मानकर अपने को संयमित कर सको और सावधानी के साथ वहाँ रह सको, तो भी वनवास के कारण दुःखी पाण्डवों के बीच यह मानकर रहना तुम्हारे लिए दुःखदायी होगा कि ये लोग सत्यवादी होने के कारण हमारा कुछ नहीं बिगाड़ेंगे॥15॥
Or if you can control yourself and stay there with caution after listening to me, then also it will be painful for you to live among the Pandavas who are distressed due to their exile, believing that these people will not harm us because they are truthful. ॥15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥