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mahabharat 3.239.14: पहले जब अर्जुन को दिव्यास्त्र प्राप्त नहीं हुए थे, तब भी उन्होंने सम्पूर्ण पृथ्वी पर विजय प्राप्त कर ली थी। अब जब महारथी अर्जुन दिव्यास्त्रों के प्रयोग में निपुण हैं, तो क्या यह कोई बड़ी बात है कि वे तुम्हें मार डालें?॥14॥   |   mahabharat अध्याय 3.239: कर्ण आदिके द्वारा द्वैतवनमें जानेका प्रस्ताव, राजा धृतराष्ट्रकी अस्वीकृति, शकुनिका समझाना, धृतराष्ट्रका अनुमति देना तथा दुर्योधनका प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 239: कर्ण आदिके द्वारा द्वैतवनमें जानेका प्रस्ताव, राजा धृतराष्ट्रकी अस्वीकृति, शकुनिका समझाना, धृतराष्ट्रका अनुमति देना तथा दुर्योधनका प्रस्थान  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.239.14 
अकृतास्त्रेण पृथिवी जिता बीभत्सुना पुरा।
किं पुन: स कृतास्त्रोऽद्य न हन्याद् वो महारथ:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
पहले जब अर्जुन को दिव्यास्त्र प्राप्त नहीं हुए थे, तब भी उन्होंने सम्पूर्ण पृथ्वी पर विजय प्राप्त कर ली थी। अब जब महारथी अर्जुन दिव्यास्त्रों के प्रयोग में निपुण हैं, तो क्या यह कोई बड़ी बात है कि वे तुम्हें मार डालें?॥14॥
 
Earlier, when Arjuna had not received the divine weapons, he had conquered the entire earth. Now, the great warrior Arjuna is an expert in the use of divine weapons, is it a big deal if he kills you?॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)