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mahabharat 3.239.13: महाबाहु धनंजय इन्द्रलोक में निवास कर चुके हैं और वहाँ से दिव्यास्त्रों की शिक्षा लेकर वे वन में लौट गए हैं ॥13॥   |   mahabharat अध्याय 3.239: कर्ण आदिके द्वारा द्वैतवनमें जानेका प्रस्ताव, राजा धृतराष्ट्रकी अस्वीकृति, शकुनिका समझाना, धृतराष्ट्रका अनुमति देना तथा दुर्योधनका प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 239: कर्ण आदिके द्वारा द्वैतवनमें जानेका प्रस्ताव, राजा धृतराष्ट्रकी अस्वीकृति, शकुनिका समझाना, धृतराष्ट्रका अनुमति देना तथा दुर्योधनका प्रस्थान  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.239.13 
उषितो हि महाबाहुरिन्द्रलोके धनंजय:।
दिव्यान्यस्त्राण्यवाप्याथ तत: प्रत्यागतो वनम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
महाबाहु धनंजय इन्द्रलोक में निवास कर चुके हैं और वहाँ से दिव्यास्त्रों की शिक्षा लेकर वे वन में लौट गए हैं ॥13॥
 
The mighty-armed Dhananjaya has lived in the Indraloka and after learning the divine weapons from there, he has returned to the forest. ॥13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)