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mahabharat 3.239.11: या फिर, उन योद्धाओं के पास हथियारों की कोई कमी नहीं है। उनका क्रोध हमेशा तुम्हारे ऊपर बना रहता है। वे हमेशा अपनी तलवारें बाँधे रहते हैं; इसलिए वे अपने हथियारों की तीक्ष्णता से तुम्हें जला सकते हैं।   |   mahabharat अध्याय 3.239: कर्ण आदिके द्वारा द्वैतवनमें जानेका प्रस्ताव, राजा धृतराष्ट्रकी अस्वीकृति, शकुनिका समझाना, धृतराष्ट्रका अनुमति देना तथा दुर्योधनका प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 239: कर्ण आदिके द्वारा द्वैतवनमें जानेका प्रस्ताव, राजा धृतराष्ट्रकी अस्वीकृति, शकुनिका समझाना, धृतराष्ट्रका अनुमति देना तथा दुर्योधनका प्रस्थान  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.239.11 
अथवा सायुधा वीरा मन्युनाभिपरिप्लुता:।
सहिता बद्धनिस्त्रिंशा दहेयु: शस्त्रतेजसा॥ ११॥
 
 
अनुवाद
या फिर, उन योद्धाओं के पास हथियारों की कोई कमी नहीं है। उनका क्रोध हमेशा तुम्हारे ऊपर बना रहता है। वे हमेशा अपनी तलवारें बाँधे रहते हैं; इसलिए वे अपने हथियारों की तीक्ष्णता से तुम्हें जला सकते हैं।
 
Or, those warriors have no shortage of weapons. Their anger towards you is always there. They always stay together with their swords tied; hence they can burn you with the sharpness of their weapons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)