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mahabharat 3.238.9: मैं सम्पूर्ण पृथ्वी का राज्य प्राप्त करने से भी अधिक प्रसन्नता से पाण्डवों को छाल के वस्त्र पहने और मृगचर्म धारण करते हुए देखूँगा।॥9॥   |   mahabharat अध्याय 3.238: दुर्योधनके द्वारा कर्ण और शकुनिकी मन्त्रणा स्वीकार करना तथा कर्ण आदिका घोषयात्राको निमित्त बनाकर द्वैतवनमें जानेके लिये धृतराष्ट्रसे आज्ञा लेने जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 238: दुर्योधनके द्वारा कर्ण और शकुनिकी मन्त्रणा स्वीकार करना तथा कर्ण आदिका घोषयात्राको निमित्त बनाकर द्वैतवनमें जानेके लिये धृतराष्ट्रसे आज्ञा लेने जाना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.238.9 
न तथा ह्याप्नुयां प्रीतिमवाप्य वसुधामिमाम्।
दृष्ट्वा यथा पाण्डुसुतान् वल्कलाजिनवासस:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
मैं सम्पूर्ण पृथ्वी का राज्य प्राप्त करने से भी अधिक प्रसन्नता से पाण्डवों को छाल के वस्त्र पहने और मृगचर्म धारण करते हुए देखूँगा।॥9॥
 
I will be happier on seeing the Pandavas dressed in bark clothes and wearing deerskin than on gaining the kingdom of the entire earth.'॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)