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mahabharat 3.238.8: यदि मैं भीमसेन और अर्जुन को द्रौपदी के साथ वन में कष्ट सहते हुए देख पाता, तो मुझे भी बहुत प्रसन्नता होती ॥8॥   |   mahabharat अध्याय 3.238: दुर्योधनके द्वारा कर्ण और शकुनिकी मन्त्रणा स्वीकार करना तथा कर्ण आदिका घोषयात्राको निमित्त बनाकर द्वैतवनमें जानेके लिये धृतराष्ट्रसे आज्ञा लेने जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 238: दुर्योधनके द्वारा कर्ण और शकुनिकी मन्त्रणा स्वीकार करना तथा कर्ण आदिका घोषयात्राको निमित्त बनाकर द्वैतवनमें जानेके लिये धृतराष्ट्रसे आज्ञा लेने जाना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.238.8 
ममापि हि महान् हर्षो यदहं भीमफाल्गुनौ।
क्लिष्टावरण्ये पश्येयं कृष्णया सहिताविति॥ ८॥
 
 
अनुवाद
यदि मैं भीमसेन और अर्जुन को द्रौपदी के साथ वन में कष्ट सहते हुए देख पाता, तो मुझे भी बहुत प्रसन्नता होती ॥8॥
 
If I could see Bhimasena and Arjuna suffering in the forest with Draupadi, I too would be very happy. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)