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mahabharat 3.238.6: जब जुआ खेलने का अवसर आया, तब विदुरजी ने मुझसे, आपसे और (चाचा) शकुनि से क्या कहा था, यह तो आप जानते ही हैं॥6॥   |   mahabharat अध्याय 3.238: दुर्योधनके द्वारा कर्ण और शकुनिकी मन्त्रणा स्वीकार करना तथा कर्ण आदिका घोषयात्राको निमित्त बनाकर द्वैतवनमें जानेके लिये धृतराष्ट्रसे आज्ञा लेने जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 238: दुर्योधनके द्वारा कर्ण और शकुनिकी मन्त्रणा स्वीकार करना तथा कर्ण आदिका घोषयात्राको निमित्त बनाकर द्वैतवनमें जानेके लिये धृतराष्ट्रसे आज्ञा लेने जाना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.238.6 
जानासि हि यथा क्षत्ता द्यूतकाल उपस्थिते।
अब्रवीद् यच्च मां त्वां च सौबलं वचनं तदा॥ ६॥
 
 
अनुवाद
जब जुआ खेलने का अवसर आया, तब विदुरजी ने मुझसे, आपसे और (चाचा) शकुनि से क्या कहा था, यह तो आप जानते ही हैं॥6॥
 
You already know what Vidur ji said to me, you and (uncle) Shakuni when the occasion of gambling arose.॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)