Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.238.5: "हे महाबली कर्ण! (पिताजी को यह समझने में देर नहीं लगेगी कि) द्वैतवन में जाने का हमारा और कोई प्रयोजन नहीं है, सिवाय वन में रहने वाले पाण्डवों का समूल नाश करने के॥5॥ | mahabharat अध्याय 3.238: दुर्योधनके द्वारा कर्ण और शकुनिकी मन्त्रणा स्वीकार करना तथा कर्ण आदिका घोषयात्राको निमित्त बनाकर द्वैतवनमें जानेके लिये धृतराष्ट्रसे आज्ञा लेने जाना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न हि द्वैतवने किंचिद् विद्यतेऽन्यत् प्रयोजनम्।
उत्सादनमृते तेषां वनस्थानां महाद्युते॥ ५॥
अनुवाद
"हे महाबली कर्ण! (पिताजी को यह समझने में देर नहीं लगेगी कि) द्वैतवन में जाने का हमारा और कोई प्रयोजन नहीं है, सिवाय वन में रहने वाले पाण्डवों का समूल नाश करने के॥5॥
"O mighty Karna! (It will not take long for father to understand that) there is no other purpose of our going to Dwaitvan except to uproot the Pandavas who are living in the forest. ॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥