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mahabharat 3.238.4: ‘अथवा यदि उन्हें पता चल जाए कि हम वहाँ क्या करना चाहते हैं, तो भविष्य में आने वाले संकटों से बचाने के लिए वे हमें वहाँ जाने की अनुमति नहीं देंगे।॥4॥   |   mahabharat अध्याय 3.238: दुर्योधनके द्वारा कर्ण और शकुनिकी मन्त्रणा स्वीकार करना तथा कर्ण आदिका घोषयात्राको निमित्त बनाकर द्वैतवनमें जानेके लिये धृतराष्ट्रसे आज्ञा लेने जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 238: दुर्योधनके द्वारा कर्ण और शकुनिकी मन्त्रणा स्वीकार करना तथा कर्ण आदिका घोषयात्राको निमित्त बनाकर द्वैतवनमें जानेके लिये धृतराष्ट्रसे आज्ञा लेने जाना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.238.4 
अथवाप्यनुबुध्येत नृपोऽस्माकं चिकीर्षितम्।
एवमप्यायतिं रक्षन्नाभ्यनुज्ञातुमर्हति॥ ४॥
 
 
अनुवाद
‘अथवा यदि उन्हें पता चल जाए कि हम वहाँ क्या करना चाहते हैं, तो भविष्य में आने वाले संकटों से बचाने के लिए वे हमें वहाँ जाने की अनुमति नहीं देंगे।॥4॥
 
‘Or if they come to know what we want to do there, then to protect us from future troubles they will not allow us to go there.॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)