Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.238.24: तत्पश्चात् अपनी योजना सफल हुई देखकर वे सब लोग प्रसन्नतापूर्वक एक-दूसरे के हाथ ताली बजाकर हँसने लगे। फिर ऐसा निश्चय करके वे तीनों कौरव श्रेष्ठ राजा धृतराष्ट्र से मिले॥24॥ | mahabharat अध्याय 3.238: दुर्योधनके द्वारा कर्ण और शकुनिकी मन्त्रणा स्वीकार करना तथा कर्ण आदिका घोषयात्राको निमित्त बनाकर द्वैतवनमें जानेके लिये धृतराष्ट्रसे आज्ञा लेने जाना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्पश्चात् अपनी योजना सफल हुई देखकर वे सब लोग प्रसन्नतापूर्वक एक-दूसरे के हाथ ताली बजाकर हँसने लगे। फिर ऐसा निश्चय करके वे तीनों कौरव श्रेष्ठ राजा धृतराष्ट्र से मिले॥24॥
After that, seeing that their plan was successful, they all started laughing and clapping each other's hands happily. Then with this decision, all three Kurus met the best king Dhritarashtra. 24॥
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि घोषयात्रापर्वणि घोषयात्रामन्त्रणे अष्टात्रिंशदधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २३८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत घोषयात्रापर्वमें घोषयात्राके सम्बन्धमें परामर्शविषयक दो सौ अड़तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २३८॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥