Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.238.22: द्वैतवन जाने की यह विधि मुझे सर्वथा निर्दोष प्रतीत होती है। राजा धृतराष्ट्र अवश्य ही हमें इसकी अनुमति देंगे और वहाँ जाकर क्या करना चाहिए, यह भी बताएँगे॥ 22॥ | mahabharat अध्याय 3.238: दुर्योधनके द्वारा कर्ण और शकुनिकी मन्त्रणा स्वीकार करना तथा कर्ण आदिका घोषयात्राको निमित्त बनाकर द्वैतवनमें जानेके लिये धृतराष्ट्रसे आज्ञा लेने जाना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
द्वैतवन जाने की यह विधि मुझे सर्वथा निर्दोष प्रतीत होती है। राजा धृतराष्ट्र अवश्य ही हमें इसकी अनुमति देंगे और वहाँ जाकर क्या करना चाहिए, यह भी बताएँगे॥ 22॥
‘This method of going to Dwaitvan seems absolutely flawless to me. King Dhritarashtra will surely give us permission for this and will also explain to us what we should do after going there.॥ 22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥