Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.238.20: महाराज! अपनी गायों को देखने के लिए यात्रा करना सदैव उचित होता है; ऐसे बहाने से पिताजी आपको वहाँ जाने की अनुमति अवश्य दे सकते हैं।'   |   mahabharat अध्याय 3.238: दुर्योधनके द्वारा कर्ण और शकुनिकी मन्त्रणा स्वीकार करना तथा कर्ण आदिका घोषयात्राको निमित्त बनाकर द्वैतवनमें जानेके लिये धृतराष्ट्रसे आज्ञा लेने जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 238: दुर्योधनके द्वारा कर्ण और शकुनिकी मन्त्रणा स्वीकार करना तथा कर्ण आदिका घोषयात्राको निमित्त बनाकर द्वैतवनमें जानेके लिये धृतराष्ट्रसे आज्ञा लेने जाना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.238.20 
उचितं हि सदा गन्तुं घोषयात्रां विशाम्पते।
एवं च त्वां पिता राजन् समनुज्ञातुमर्हति॥ २०॥
 
 
अनुवाद
महाराज! अपनी गायों को देखने के लिए यात्रा करना सदैव उचित होता है; ऐसे बहाने से पिताजी आपको वहाँ जाने की अनुमति अवश्य दे सकते हैं।'
 
King! It is always appropriate to travel to see your cows; on such an excuse, father may certainly give you permission to go there.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)