Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.238.19: नरेश्वर! इस समय जितने भी गौएँ निवास करती हैं, वे सब द्वैतवन में ही हैं और वहाँ आपके आगमन की सदैव प्रतीक्षा रहती है, अतः घोषयात्रा के बहाने (उन स्थानों को देखने के लिए) हम अवश्य ही वहाँ जा सकेंगे॥ 19॥   |   mahabharat अध्याय 3.238: दुर्योधनके द्वारा कर्ण और शकुनिकी मन्त्रणा स्वीकार करना तथा कर्ण आदिका घोषयात्राको निमित्त बनाकर द्वैतवनमें जानेके लिये धृतराष्ट्रसे आज्ञा लेने जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 238: दुर्योधनके द्वारा कर्ण और शकुनिकी मन्त्रणा स्वीकार करना तथा कर्ण आदिका घोषयात्राको निमित्त बनाकर द्वैतवनमें जानेके लिये धृतराष्ट्रसे आज्ञा लेने जाना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.238.19 
घोषा द्वैतवने सर्वे त्वत्प्रतीक्षा नराधिप।
घोषयात्रापदेशेन गमिष्यामो न संशय:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! इस समय जितने भी गौएँ निवास करती हैं, वे सब द्वैतवन में ही हैं और वहाँ आपके आगमन की सदैव प्रतीक्षा रहती है, अतः घोषयात्रा के बहाने (उन स्थानों को देखने के लिए) हम अवश्य ही वहाँ जा सकेंगे॥ 19॥
 
Nareshwar! At present all the places where cows reside are in Dwaitvan only and your arrival is always awaited there, therefore on the pretext of Ghoshyatra (to see those places) we shall certainly be able to go there.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)