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mahabharat 3.238.18: वहाँ कर्ण ने मुस्कराते हुए दुर्योधन से कहा - 'हे प्रभु! मैंने जो उपाय सोचा है, वह मैं आपको बताता हूँ। सुनिए।'   |   mahabharat अध्याय 3.238: दुर्योधनके द्वारा कर्ण और शकुनिकी मन्त्रणा स्वीकार करना तथा कर्ण आदिका घोषयात्राको निमित्त बनाकर द्वैतवनमें जानेके लिये धृतराष्ट्रसे आज्ञा लेने जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 238: दुर्योधनके द्वारा कर्ण और शकुनिकी मन्त्रणा स्वीकार करना तथा कर्ण आदिका घोषयात्राको निमित्त बनाकर द्वैतवनमें जानेके लिये धृतराष्ट्रसे आज्ञा लेने जाना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.238.18 
ततो दुर्योधनं कर्ण: प्रहसन्निदमब्रवीत्।
उपाय: परिदृष्टोऽयं तं निबोध जनेश्वर॥ १८॥
 
 
अनुवाद
वहाँ कर्ण ने मुस्कराते हुए दुर्योधन से कहा - 'हे प्रभु! मैंने जो उपाय सोचा है, वह मैं आपको बताता हूँ। सुनिए।'
 
There Karna smilingly said to Duryodhan - 'O Lord! I will tell you the solution that I have thought of. Listen.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)