Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.238.15: जब मैं वहाँ बैठूँ और कौरवों में श्रेष्ठ भीष्मजी भी उपस्थित हों, तब जो भी उपाय मेरे सामने आए, उसे तुम और शकुनि दोनों से कहना॥15॥   |   mahabharat अध्याय 3.238: दुर्योधनके द्वारा कर्ण और शकुनिकी मन्त्रणा स्वीकार करना तथा कर्ण आदिका घोषयात्राको निमित्त बनाकर द्वैतवनमें जानेके लिये धृतराष्ट्रसे आज्ञा लेने जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 238: दुर्योधनके द्वारा कर्ण और शकुनिकी मन्त्रणा स्वीकार करना तथा कर्ण आदिका घोषयात्राको निमित्त बनाकर द्वैतवनमें जानेके लिये धृतराष्ट्रसे आज्ञा लेने जाना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.238.15 
मयि तत्रोपविष्टे तु भीष्मे च कुरुसत्तमे।
उपायो यो भवेद् दृष्टस्तं ब्रूया: सहसौबल:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
जब मैं वहाँ बैठूँ और कौरवों में श्रेष्ठ भीष्मजी भी उपस्थित हों, तब जो भी उपाय मेरे सामने आए, उसे तुम और शकुनि दोनों से कहना॥15॥
 
When I sit there and the best of the Kurus, Bhishmaji, is also present, then whatever solution appears before me, tell it to both of you and Shakuni.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)