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mahabharat 3.238.12: परंतु मुझे ऐसा कोई उपाय नहीं दिखाई देता जिससे हम द्वैतवन जा सकें; अथवा महाराज मुझे वहाँ जाने की अनुमति दें।॥12॥   |   mahabharat अध्याय 3.238: दुर्योधनके द्वारा कर्ण और शकुनिकी मन्त्रणा स्वीकार करना तथा कर्ण आदिका घोषयात्राको निमित्त बनाकर द्वैतवनमें जानेके लिये धृतराष्ट्रसे आज्ञा लेने जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 238: दुर्योधनके द्वारा कर्ण और शकुनिकी मन्त्रणा स्वीकार करना तथा कर्ण आदिका घोषयात्राको निमित्त बनाकर द्वैतवनमें जानेके लिये धृतराष्ट्रसे आज्ञा लेने जाना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.238.12 
उपायं न तु पश्यामि येन गच्छेम तद् वनम्।
यथा चाभ्यनुजानीयाद् गच्छन्तं मां महीपति:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
परंतु मुझे ऐसा कोई उपाय नहीं दिखाई देता जिससे हम द्वैतवन जा सकें; अथवा महाराज मुझे वहाँ जाने की अनुमति दें।॥12॥
 
‘But I cannot see any way by which we can go to Dwaitavan; or Maharaja should give me permission to go there.’॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)