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mahabharat 3.238.11: यदि धर्मराज युधिष्ठिर और पाण्डुनन्दन भीमसेन मुझे परम उत्तम राजलक्ष्मी से युक्त देखेंगे, तो मेरा जीवन सफल हो जाएगा ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 3.238: दुर्योधनके द्वारा कर्ण और शकुनिकी मन्त्रणा स्वीकार करना तथा कर्ण आदिका घोषयात्राको निमित्त बनाकर द्वैतवनमें जानेके लिये धृतराष्ट्रसे आज्ञा लेने जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 238: दुर्योधनके द्वारा कर्ण और शकुनिकी मन्त्रणा स्वीकार करना तथा कर्ण आदिका घोषयात्राको निमित्त बनाकर द्वैतवनमें जानेके लिये धृतराष्ट्रसे आज्ञा लेने जाना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.238.11 
यदि मां धर्मराजश्च भीमसेनश्च पाण्डव:।
युक्तं परमया लक्ष्म्या पश्येतां जीवितं भवेत्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
यदि धर्मराज युधिष्ठिर और पाण्डुनन्दन भीमसेन मुझे परम उत्तम राजलक्ष्मी से युक्त देखेंगे, तो मेरा जीवन सफल हो जाएगा ॥11॥
 
If Dharamraj Yudhishthir and Pandunandan Bhimsen see me blessed with the most excellent Rajalakshmi, then my life will be successful. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)