श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 237: शकुनि और कर्णका दुर्योधनकी प्रशंसा करते हुए उसे वनमें पाण्डवोंके पास चलनेके लिये उभाड़ना  »  श्लोक d1
 
 
श्लोक  3.237.d1 
(तवाद्य पृथिवी राजन्नखिला सागराम्बरा।
सपर्वतवनारामा सह स्थावरजङ्गमा॥ )
 
 
अनुवाद
'राजन्! आज समुद्र पर्यन्त यह सम्पूर्ण पृथ्वी, पर्वत, वन, उद्यान तथा स्थावर एवं जंगम स्थानों सहित, आपके अधीन है।
 
‘King! Today this entire earth up to the sea, including the mountains, forests, gardens and immovable and mobile places, is under your control.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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