श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 237: शकुनि और कर्णका दुर्योधनकी प्रशंसा करते हुए उसे वनमें पाण्डवोंके पास चलनेके लिये उभाड़ना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.237.2 
प्रव्राज्य पाण्डवान् वीरान् स्वेन वीर्येण भारत।
भुङ्क्ष्वेमां पृथिवीमेको दिवि शम्बरहा यथा॥ २॥
 
 
अनुवाद
भरतनंदन! आपने अपने पराक्रम से वीर पाण्डवों को वनवासी बना दिया है। अब आप ही इस पृथ्वी का राज्य भोगें, जैसे स्वर्ग में इन्द्र करते हैं॥ 2॥
 
Bharatanandan! By your valour you have banished the brave Pandavas and made them forest dwellers. Now you alone enjoy the kingdom of this earth like Indra in heaven.॥ 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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