श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 237: शकुनि और कर्णका दुर्योधनकी प्रशंसा करते हुए उसे वनमें पाण्डवोंके पास चलनेके लिये उभाड़ना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.237.16 
महाभिजनसम्पन्नं भद्रे महति संस्थितम्।
पाण्डवास्त्वाभिवीक्षन्तां ययातिमिव नाहुषम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
पाण्डव तुम्हें नहुषनन्दन ययातिकि के समान महान् कुल में उत्पन्न और अत्यन्त शुभ पद पर स्थित देखें॥16॥
 
May the Pandavas see you born in a great lineage like Nahushanandan Yayatiki and established in a very auspicious position. 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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