Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.237.14: महाराज! आप उत्तम राजसी धन से विभूषित होकर वहाँ जाइये और जैसे सूर्यदेव अपने तेज से संसार को कष्ट देते हैं, उसी प्रकार पाण्डुपुत्रों को कष्ट दीजिये। | mahabharat अध्याय 3.237: शकुनि और कर्णका दुर्योधनकी प्रशंसा करते हुए उसे वनमें पाण्डवोंके पास चलनेके लिये उभाड़ना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स प्रयाहि महाराज श्रिया परमया युत:।
तापयन् पाण्डुपुत्रांस्त्वं रश्मिवानिव तेजसा॥ १४॥
अनुवाद
महाराज! आप उत्तम राजसी धन से विभूषित होकर वहाँ जाइये और जैसे सूर्यदेव अपने तेज से संसार को कष्ट देते हैं, उसी प्रकार पाण्डुपुत्रों को कष्ट दीजिये।
Maharaj! Adorned with the excellent royal wealth, you should go there and just as the Sun torments the world with his brilliance, in the same way torment the sons of Pandu.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥