श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 237: शकुनि और कर्णका दुर्योधनकी प्रशंसा करते हुए उसे वनमें पाण्डवोंके पास चलनेके लिये उभाड़ना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.237.13 
श्रूयते हि महाराज सरो द्वैतवनं प्रति।
वसन्त: पाण्डवा: सार्धं ब्राह्मणैर्वनवासिभि:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
महाराज, मैंने सुना है कि पाण्डव द्वैतवन में एक सरोवर के किनारे वनवासी ब्राह्मणों के साथ रहते हैं॥13॥
 
Maharaj, I have heard that the Pandavas live with the forest-dwelling Brahmins on the banks of a lake in Dwaitavan.॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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