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mahabharat 3.237.12: हम उन पाण्डवों की दुर्दशा देख रहे हैं जिन्होंने आपकी आज्ञा का पालन नहीं किया और जो आपके अधीन नहीं रहे। वे राजसी धन से वंचित होकर वन में रह रहे हैं॥12॥   |   mahabharat अध्याय 3.237: शकुनि और कर्णका दुर्योधनकी प्रशंसा करते हुए उसे वनमें पाण्डवोंके पास चलनेके लिये उभाड़ना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 237: शकुनि और कर्णका दुर्योधनकी प्रशंसा करते हुए उसे वनमें पाण्डवोंके पास चलनेके लिये उभाड़ना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.237.12 
यै: स्म ते नाद्रियेताज्ञा न च ये शासने स्थिता:।
पश्यामस्तान् श्रिया हीनान् पाण्डवान् वनवासिन:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
हम उन पाण्डवों की दुर्दशा देख रहे हैं जिन्होंने आपकी आज्ञा का पालन नहीं किया और जो आपके अधीन नहीं रहे। वे राजसी धन से वंचित होकर वन में रह रहे हैं॥12॥
 
‘We are seeing the plight of those Pandavas who did not obey your orders and were not under your rule. They are deprived of the royal wealth and live in the forest.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)