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mahabharat 3.236.9: हे मेरे पुत्रों में ज्येष्ठ, जो सत्यवादी, पवित्र और सदाचारी हैं और जो रंकु मृग के (कोमल) रोमों से बने हुए शय्याओं पर सोते थे, वे अटल शत्रु धर्मराज युधिष्ठिर इन दिनों भूमि पर कैसे सो रहे होंगे?॥9॥   |   mahabharat अध्याय 3.236: पाण्डवोंका समाचार सुनकर धृतराष्ट्रका खेद और चिन्तापूर्ण उद्‍गार   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 236: पाण्डवोंका समाचार सुनकर धृतराष्ट्रका खेद और चिन्तापूर्ण उद्‍गार  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.236.9 
कथं नु सत्य: शुचिरार्यवृत्तो
ज्येष्ठ: सुतानां मम धर्मराज:।
अजातशत्रु: पृथिवीतले स्म
शेते पुरा राङ्कवकूटशायी॥ ९॥
 
 
अनुवाद
हे मेरे पुत्रों में ज्येष्ठ, जो सत्यवादी, पवित्र और सदाचारी हैं और जो रंकु मृग के (कोमल) रोमों से बने हुए शय्याओं पर सोते थे, वे अटल शत्रु धर्मराज युधिष्ठिर इन दिनों भूमि पर कैसे सो रहे होंगे?॥9॥
 
Oh! The eldest of all my sons, who is truthful, pure and virtuous, and who used to sleep on beds made of the (soft) hair of the Ranku deer, how would that unfailing enemy, Dharmaraja Yudhishthira, be sleeping on the ground these days?॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)