Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.236.7-8: ब्राह्मण के ये वचन सुनकर विचित्रवीर्य के पुत्र राजा धृतराष्ट्र दया से द्रवित हो गए और अत्यन्त दुःखी हुए। जब उन्होंने सुना कि पाण्डव राजा के पुत्र और पौत्र होते हुए भी इस प्रकार शोक की नदी में डूब रहे हैं, तब उनका हृदय करुणा से भर गया और उन्होंने गहरी साँस लेकर तथा किसी प्रकार धैर्य धारण करके यह समझ लिया कि यह सब मेरे ही कर्मों का फल है और इस प्रकार बोले -॥7-8॥ | mahabharat अध्याय 3.236: पाण्डवोंका समाचार सुनकर धृतराष्ट्रका खेद और चिन्तापूर्ण उद्गार । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत: कथास्तस्य निशम्य राजा
वैचित्रवीर्य: कृपयाभितप्त:।
वने तथा पार्थिवपुत्रपौत्रान्
श्रुत्वा तथा दु:खनदीं प्रपन्नान्॥ ७॥
प्रोवाच दैन्याभिहतान्तरात्मा
नि:श्वासवातोपहतस्तदानीम्।
वाचं कथंचित् स्थिरतामुपेत्य
तत् सर्वमात्मप्रभवं विचिन्त्य॥ ८॥
अनुवाद
ब्राह्मण के ये वचन सुनकर विचित्रवीर्य के पुत्र राजा धृतराष्ट्र दया से द्रवित हो गए और अत्यन्त दुःखी हुए। जब उन्होंने सुना कि पाण्डव राजा के पुत्र और पौत्र होते हुए भी इस प्रकार शोक की नदी में डूब रहे हैं, तब उनका हृदय करुणा से भर गया और उन्होंने गहरी साँस लेकर तथा किसी प्रकार धैर्य धारण करके यह समझ लिया कि यह सब मेरे ही कर्मों का फल है और इस प्रकार बोले -॥7-8॥
On hearing these words of the Brahmin, King Dhritarashtra, the son of Vichitravirya, was moved with pity and became very sad. When he heard that the Pandavas, despite being the sons and grandsons of the king, were drowning in the river of sorrow in this way, his heart was filled with compassion and he, taking deep breaths and somehow maintaining patience, understood that everything was the result of his own deeds and spoke thus -॥ 7-8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥