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mahabharat 3.236.6: उन्होंने बताया, ‘इस समय पाण्डव वायु और ताप आदि के कष्टों से अत्यन्त क्षीण हो गए हैं। वे भयंकर दुःखों के वश में हैं और वीर पत्नी द्रौपदी भी अनाथ की भाँति सब ओर से दुःख भोग रही है।’ ॥6॥   |   mahabharat अध्याय 3.236: पाण्डवोंका समाचार सुनकर धृतराष्ट्रका खेद और चिन्तापूर्ण उद्‍गार   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 236: पाण्डवोंका समाचार सुनकर धृतराष्ट्रका खेद और चिन्तापूर्ण उद्‍गार  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.236.6 
कृशांश्च वातातपकर्शिताङ्गान्
दु:खस्य चोग्रस्य मुखे प्रपन्नान्।
तां चाप्यनाथामिव वीरनाथां
कृष्णां परिक्लेशगुणेन युक्ताम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने बताया, ‘इस समय पाण्डव वायु और ताप आदि के कष्टों से अत्यन्त क्षीण हो गए हैं। वे भयंकर दुःखों के वश में हैं और वीर पत्नी द्रौपदी भी अनाथ की भाँति सब ओर से दुःख भोग रही है।’ ॥6॥
 
He told, 'At this time the Pandavas have become very emaciated due to the hardships of wind and heat etc. They are in the grip of terrible misery and the brave wife Draupadi is also suffering from pain from all sides like an orphan.' ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)