Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.236.31: राजा धृतराष्ट्र द्वारा एकान्त में कही गई उपरोक्त सारी बातें सुनकर सुबलपुत्र शकुनि ने दुर्योधन और कर्ण के पास जाकर वही बात कही। इससे मन्दबुद्धि दुर्योधन दुःखी और चिन्तित हो गया॥ 31॥ | mahabharat अध्याय 3.236: पाण्डवोंका समाचार सुनकर धृतराष्ट्रका खेद और चिन्तापूर्ण उद्गार । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजा धृतराष्ट्र द्वारा एकान्त में कही गई उपरोक्त सारी बातें सुनकर सुबलपुत्र शकुनि ने दुर्योधन और कर्ण के पास जाकर वही बात कही। इससे मन्दबुद्धि दुर्योधन दुःखी और चिन्तित हो गया॥ 31॥
After listening to all the above words spoken by King Dhritarashtra in private, Shakuni, son of Subala, went to Duryodhan and Karna and told them the same thing. This made the slow-witted Duryodhan sad and worried.॥ 31॥
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि घोषयात्रापर्वणि धृतराष्ट्रखेदवाक्ये षट्त्रिंशदधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २३६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत घोषयात्रापर्वमें धृतराष्ट्रके खेदयुक्त वचनसे सम्बन्ध रखनेवाला दो सौ छत्तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २३६॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥