Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.236.27: ‘यदि प्राप्त धन का वितरण उचित रीति से न किया जाए, तो वह कच्चे घड़े में रखे जल के समान व्यर्थ क्यों न हो जाएगा? ऐसा समझकर उसकी रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। यदि उचित बँटवारे द्वारा धन की रक्षा न की जाए, तो वह सैकड़ों प्रकार से बिखर जाएगा। इस लोक में किए गए कर्मों का फल नष्ट नहीं होता – यह निश्चित है। (इससे सिद्ध होता है कि उसका उचित रीति से वितरण करना ही उचित है)॥27॥ | mahabharat अध्याय 3.236: पाण्डवोंका समाचार सुनकर धृतराष्ट्रका खेद और चिन्तापूर्ण उद्गार । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कथं न भिद्येत न च स्रवेत
न च प्रसिच्येदिति रक्षितव्यम्।
अरक्ष्यमाणं शतधा प्रकीर्येद्
ध्रुवं न नाशोऽस्ति कृतस्य लोके॥ २७॥
अनुवाद
‘यदि प्राप्त धन का वितरण उचित रीति से न किया जाए, तो वह कच्चे घड़े में रखे जल के समान व्यर्थ क्यों न हो जाएगा? ऐसा समझकर उसकी रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। यदि उचित बँटवारे द्वारा धन की रक्षा न की जाए, तो वह सैकड़ों प्रकार से बिखर जाएगा। इस लोक में किए गए कर्मों का फल नष्ट नहीं होता – यह निश्चित है। (इससे सिद्ध होता है कि उसका उचित रीति से वितरण करना ही उचित है)॥27॥
‘If the wealth received is not distributed in the right way, then why will it not be wasted like water kept in an unbaked pot? Thinking this, it is our duty to protect it. If wealth is not protected by proper division, then it will be scattered in hundreds of ways. The fruits of actions done in this world are not destroyed – this is certain. (This proves that it is right to distribute it in the right way)’॥ 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥