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mahabharat 3.236.26: यदि हमारी ऐसी मान्यता है, तो फिर लोभ के वश होकर हम क्यों न करने योग्य कार्य करें और दूसरों को भी क्यों वैसा ही करना चाहिए तथा बुद्धिमान लोग अपने कमाए हुए धन का दान क्यों न करें? जब धन का उपयोग करने का समय आता है, तब यदि उसका उचित उपयोग न किया जाए, तो वह अनर्थ का कारण बन जाता है। अतः हमें विचार करना चाहिए कि उस धन का उचित उपयोग क्यों नहीं हो रहा है और उसका उपयोग किस प्रकार किया जा सकता है?॥26॥   |   mahabharat अध्याय 3.236: पाण्डवोंका समाचार सुनकर धृतराष्ट्रका खेद और चिन्तापूर्ण उद्‍गार   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 236: पाण्डवोंका समाचार सुनकर धृतराष्ट्रका खेद और चिन्तापूर्ण उद्‍गार  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.236.26 
क्रियेत कस्मादपरे च कुर्यु-
र्वित्तं न दद्यु: पुरुषा: कथंचित्।
प्राप्यार्थकालं च भवेदनर्थ:
कथं न तत् स्यादिति तत् कुत: स्यात्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
यदि हमारी ऐसी मान्यता है, तो फिर लोभ के वश होकर हम क्यों न करने योग्य कार्य करें और दूसरों को भी क्यों वैसा ही करना चाहिए तथा बुद्धिमान लोग अपने कमाए हुए धन का दान क्यों न करें? जब धन का उपयोग करने का समय आता है, तब यदि उसका उचित उपयोग न किया जाए, तो वह अनर्थ का कारण बन जाता है। अतः हमें विचार करना चाहिए कि उस धन का उचित उपयोग क्यों नहीं हो रहा है और उसका उपयोग किस प्रकार किया जा सकता है?॥26॥
 
‘If we have this belief, then why should we do things which are not to be done under the influence of greed and why should others do the same and why should not the wise people donate the money they have earned? When the time comes for using the money, if it is not used properly then it becomes the cause of disaster. Therefore, we should think why that money is not being used properly and how can it be used?॥26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)