Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.236.25: 'बिना किसी प्रेरणा के भी वायु अवश्य चलेगी। जो स्त्री गर्भवती है, वह अवश्य ही समय पर संतान को जन्म देगी। दिन के आरंभ में रात्रि का अंत अवश्यंभावी है और रात्रि के आरंभ में दिन का अंत भी निश्चित है। (इसी प्रकार पापों के फल से कोई भी बच नहीं सकता।)॥25॥ | mahabharat अध्याय 3.236: पाण्डवोंका समाचार सुनकर धृतराष्ट्रका खेद और चिन्तापूर्ण उद्गार । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ध्रुवं प्रवास्यत्यसमीरितोऽपि
ध्रुवं प्रजास्यत्युत गर्भिणी या।
ध्रुवं दिनादौ रजनीप्रणाश-
स्तथा क्षपादौ च दिनप्रणाश:॥ २५॥
अनुवाद
'बिना किसी प्रेरणा के भी वायु अवश्य चलेगी। जो स्त्री गर्भवती है, वह अवश्य ही समय पर संतान को जन्म देगी। दिन के आरंभ में रात्रि का अंत अवश्यंभावी है और रात्रि के आरंभ में दिन का अंत भी निश्चित है। (इसी प्रकार पापों के फल से कोई भी बच नहीं सकता।)॥25॥
‘The wind will definitely blow even without any inspiration. The woman who is pregnant will definitely give birth to a child in due time. At the beginning of the day, the end of the night is inevitable and at the beginning of the night, the end of the day is certain. (Similarly, the consequences of sins cannot be avoided by anyone.)॥ 25॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥