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mahabharat 3.236.24: 'जुए के प्रेमी शकुनि ने जुआ खेलकर अच्छा नहीं किया। अध्यात्म में लीन युधिष्ठिर ने उसे तुरंत न मारकर अच्छा नहीं किया। इसी प्रकार मैंने भी दुष्ट पुत्र के प्रभाव में आकर अच्छा नहीं किया। इसी का परिणाम है कि कौरवों का अंत आ पहुँचा है।॥ 24॥   |   mahabharat अध्याय 3.236: पाण्डवोंका समाचार सुनकर धृतराष्ट्रका खेद और चिन्तापूर्ण उद्‍गार   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 236: पाण्डवोंका समाचार सुनकर धृतराष्ट्रका खेद और चिन्तापूर्ण उद्‍गार  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.236.24 
कृतं मताक्षेण यथा न साधु
साधुप्रवृत्तेन च पाण्डवेन।
मया च दुष्पुत्रवशानुगेन
तथा कुरूणामयमन्तकाल:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
'जुए के प्रेमी शकुनि ने जुआ खेलकर अच्छा नहीं किया। अध्यात्म में लीन युधिष्ठिर ने उसे तुरंत न मारकर अच्छा नहीं किया। इसी प्रकार मैंने भी दुष्ट पुत्र के प्रभाव में आकर अच्छा नहीं किया। इसी का परिणाम है कि कौरवों का अंत आ पहुँचा है।॥ 24॥
 
‘Shakuṇī, the lover of gambling, did not do well by gambling. Yudhishthira, who was engaged in spirituality, did not do well by not killing him immediately. Similarly, I have also not done well by falling under the influence of a bad son. This is the result of which the end of the Kauravas has arrived.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)