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mahabharat 3.236.21: ‘दुर्योधन, शकुनि, सूतपुत्र कर्ण और दु:शासन – ये बड़े मूर्ख हैं, क्योंकि जुए के द्वारा ये दूसरों का राज्य हड़प रहे हैं। (ये अपने ऊपर आने वाले संकट को नहीं देखते) ये वृक्ष की शाखा से टपकते हुए मधु को ही देखते हैं, वहाँ से गिरने के महान भय को नहीं देखते॥ 21॥   |   mahabharat अध्याय 3.236: पाण्डवोंका समाचार सुनकर धृतराष्ट्रका खेद और चिन्तापूर्ण उद्‍गार   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 236: पाण्डवोंका समाचार सुनकर धृतराष्ट्रका खेद और चिन्तापूर्ण उद्‍गार  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.236.21 
दुर्योधन: शकुनि: सूतपुत्रो
दु:शासनश्चापि सुमन्दचेता:।
मधु प्रपश्यन्ति न तु प्रपातं
यद् द्यूतमालम्ब्य हरन्ति राज्यम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
‘दुर्योधन, शकुनि, सूतपुत्र कर्ण और दु:शासन – ये बड़े मूर्ख हैं, क्योंकि जुए के द्वारा ये दूसरों का राज्य हड़प रहे हैं। (ये अपने ऊपर आने वाले संकट को नहीं देखते) ये वृक्ष की शाखा से टपकते हुए मधु को ही देखते हैं, वहाँ से गिरने के महान भय को नहीं देखते॥ 21॥
 
‘Duryodhan, Shakuni, Sutaputra Karna and Dushasan – these are very foolish, because with the help of gambling they are usurping the kingdom of others. (They do not see the danger coming upon them) They can only see the honey dripping from the branch of the tree, they do not see the great fear of falling from there.॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)