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mahabharat 3.236.2: वैशम्पायन बोले, "हे राजन! उस (सुन्दर) सरोवर पर पहुँचकर पाण्डवों ने वहाँ एकत्रित हुए लोगों को विदा किया और अपने लिए एक कुटिया बनाकर वे आसपास के सुन्दर वनों, पर्वतों और नदी तटों पर घूमने लगे।   |   mahabharat अध्याय 3.236: पाण्डवोंका समाचार सुनकर धृतराष्ट्रका खेद और चिन्तापूर्ण उद्‍गार   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 236: पाण्डवोंका समाचार सुनकर धृतराष्ट्रका खेद और चिन्तापूर्ण उद्‍गार  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.236.2 
वैशम्पायन उवाच
सरस्तदासाद्य तु पाण्डुपुत्रा
जनं समुत्सृज्य विधाय वेशम्।
वनानि रम्याण्यथ पर्वतांश्च
नदीप्रदेशांश्च तदा विचेरु:॥ २॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन बोले, "हे राजन! उस (सुन्दर) सरोवर पर पहुँचकर पाण्डवों ने वहाँ एकत्रित हुए लोगों को विदा किया और अपने लिए एक कुटिया बनाकर वे आसपास के सुन्दर वनों, पर्वतों और नदी तटों पर घूमने लगे।
 
Vaishmpayana said, "O King! On reaching that (beautiful) lake, the Pandavas bid farewell to the people who had gathered there and having built a hut for themselves, they started roaming in the surrounding beautiful forests, mountains and riverbanks.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)