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mahabharat 3.236.18: धर्मपुत्र युधिष्ठिर मेरे अपराध पर ध्यान नहीं देंगे। अर्जुन भी उनका अनुसरण करेंगे। परंतु इस वनवास के कारण भीमसेन का क्रोध उसी प्रकार बढ़ जाएगा, जैसे वायु के कारण अग्नि भड़क उठती है॥18॥   |   mahabharat अध्याय 3.236: पाण्डवोंका समाचार सुनकर धृतराष्ट्रका खेद और चिन्तापूर्ण उद्‍गार   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 236: पाण्डवोंका समाचार सुनकर धृतराष्ट्रका खेद और चिन्तापूर्ण उद्‍गार  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.236.18 
न पापकं ध्यास्यति धर्मपुत्रो
धनंजयश्चाप्यनुवर्त्स्यते तम्।
अरण्यवासेन विवर्धते तु
भीमस्य कोपोऽग्निरिवानिलेन॥ १८॥
 
 
अनुवाद
धर्मपुत्र युधिष्ठिर मेरे अपराध पर ध्यान नहीं देंगे। अर्जुन भी उनका अनुसरण करेंगे। परंतु इस वनवास के कारण भीमसेन का क्रोध उसी प्रकार बढ़ जाएगा, जैसे वायु के कारण अग्नि भड़क उठती है॥18॥
 
‘Dharmaputra Yudhishthira will not pay attention to my crime. Arjuna will also follow him. But due to this exile, Bhimasena's anger will increase in the same way as a fire blazes up due to wind.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)