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mahabharat 3.236.17: जुए में छल से पराजित होने पर दु:शासन ने युधिष्ठिर से जो कठोर वचन कहे थे, वे अवश्य ही भीमसेन के शरीर में प्रवेश कर गए होंगे और उन्हें उसी प्रकार जला रहे होंगे, जैसे अग्नि घास और लकड़ी के ढेर को जला देती है॥17॥   |   mahabharat अध्याय 3.236: पाण्डवोंका समाचार सुनकर धृतराष्ट्रका खेद और चिन्तापूर्ण उद्‍गार   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 236: पाण्डवोंका समाचार सुनकर धृतराष्ट्रका खेद और चिन्तापूर्ण उद्‍गार  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.236.17 
अजातशत्रौ तु जिते निकृत्या
दु:शासनो यत् परुषाण्यवोचत्।
तानि प्रविष्टानि वृकोदराङ्गं
दहन्ति कक्षाग्निरिवेन्धनानि॥ १७॥
 
 
अनुवाद
जुए में छल से पराजित होने पर दु:शासन ने युधिष्ठिर से जो कठोर वचन कहे थे, वे अवश्य ही भीमसेन के शरीर में प्रवेश कर गए होंगे और उन्हें उसी प्रकार जला रहे होंगे, जैसे अग्नि घास और लकड़ी के ढेर को जला देती है॥17॥
 
The harsh words that Dushasan had spoken to Yudhishthira after he was defeated by deceit in gambling, must have entered Bhimasena's body and are burning him like fire burns a pile of grass and wood.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)