Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.236.15: भीमसेन, जो बल में वायु के समान हैं और पवनदेव के अत्यंत पराक्रमी पुत्र हैं, उन्हें भी उनके बड़े भाई ने धर्म के बंधन में बाँध रखा है। इसलिए वे गहरी साँस लेते हुए, चुपचाप क्रोध को सहन कर रहे हैं॥ 15॥ | mahabharat अध्याय 3.236: पाण्डवोंका समाचार सुनकर धृतराष्ट्रका खेद और चिन्तापूर्ण उद्गार । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भीमसेन, जो बल में वायु के समान हैं और पवनदेव के अत्यंत पराक्रमी पुत्र हैं, उन्हें भी उनके बड़े भाई ने धर्म के बंधन में बाँध रखा है। इसलिए वे गहरी साँस लेते हुए, चुपचाप क्रोध को सहन कर रहे हैं॥ 15॥
Bheemasena, who is equal to the wind in strength and is the very powerful son of the god of wind, has also been bound by the bondage of Dharma by his elder brother. That is why he endures the anger quietly, taking deep breaths.॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥