Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.236.14: इसी प्रकार सुख भोगने के अधिकारी नकुल और सहदेव भी सुख खो बैठे हैं। दोनों भाई स्वर्ग के देवताओं अश्विनी कुमारों के समान सुन्दर हैं। वे भी रात भर जागते हुए, बेचैन होकर, भूमि पर सोए होंगे। धर्म और सत्य ही वे हैं जिन्होंने उन्हें तुरन्त आक्रमण करने से रोका है॥ 14॥ | mahabharat अध्याय 3.236: पाण्डवोंका समाचार सुनकर धृतराष्ट्रका खेद और चिन्तापूर्ण उद्गार । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तथा यमौ चाप्यसुखौ सुखार्हौ
समृद्धरूपावमरौ दिवीव।
प्रजागरस्थौ ध्रुवमप्रशान्तौ
धर्मेण सत्येन च वार्यमाणौ॥ १४॥
अनुवाद
इसी प्रकार सुख भोगने के अधिकारी नकुल और सहदेव भी सुख खो बैठे हैं। दोनों भाई स्वर्ग के देवताओं अश्विनी कुमारों के समान सुन्दर हैं। वे भी रात भर जागते हुए, बेचैन होकर, भूमि पर सोए होंगे। धर्म और सत्य ही वे हैं जिन्होंने उन्हें तुरन्त आक्रमण करने से रोका है॥ 14॥
‘Similarly, Nakul and Sahadeva, who deserve to enjoy happiness, have also lost their happiness. Both the brothers are as handsome as the gods of heaven, the Ashwini Kumars. They too must have slept on the ground, restless, awake all night. Dharma and truth are the only things that have prevented them from attacking immediately.॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥