Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.236.13: अर्जुन का तेज बड़ा भयानक है। नकुल, सहदेव, द्रौपदी, युधिष्ठिर और भीमसेन को सुख से वंचित देखकर वह सर्प के समान फुंफकार रहा होगा और क्रोध के कारण उसे नींद नहीं आ रही होगी॥13॥ | mahabharat अध्याय 3.236: पाण्डवोंका समाचार सुनकर धृतराष्ट्रका खेद और चिन्तापूर्ण उद्गार । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यमौ च कृष्णां च युधिष्ठिरं च
भीमं च दृष्ट्वा सुखविप्रयुक्तम्।
विनि:श्वसन् सर्प इवोग्रतेजा
ध्रुवं न शेते वसतीरमर्षात्॥ १३॥
अनुवाद
अर्जुन का तेज बड़ा भयानक है। नकुल, सहदेव, द्रौपदी, युधिष्ठिर और भीमसेन को सुख से वंचित देखकर वह सर्प के समान फुंफकार रहा होगा और क्रोध के कारण उसे नींद नहीं आ रही होगी॥13॥
Arjuna's brilliance is very terrifying. Seeing Nakula, Sahadeva, Draupadi, Yudhishthira and Bhimasena deprived of happiness, he must be hissing like a snake and due to anger he must certainly not be able to sleep.॥ 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥