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mahabharat 3.236.12: इसी प्रकार धर्मराज युधिष्ठिर की आज्ञा में रहने वाला सुकुमार और बुद्धिमान अर्जुन भी क्रोध के कारण सब अंगों में पीड़ा से पीड़ित हो रहा होगा और निश्चय ही वह अपनी कुटिया में भी अच्छी तरह सो नहीं पाता होगा॥ 12॥   |   mahabharat अध्याय 3.236: पाण्डवोंका समाचार सुनकर धृतराष्ट्रका खेद और चिन्तापूर्ण उद्‍गार   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 236: पाण्डवोंका समाचार सुनकर धृतराष्ट्रका खेद और चिन्तापूर्ण उद्‍गार  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.236.12 
तथार्जुन: सुकुमारो मनस्वी
वशे स्थितो धर्मसुतस्य राज्ञ:।
विदूयमानैरिव सर्वगात्रै-
र्ध्रुवं न शेते वसतीरमर्षात्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार धर्मराज युधिष्ठिर की आज्ञा में रहने वाला सुकुमार और बुद्धिमान अर्जुन भी क्रोध के कारण सब अंगों में पीड़ा से पीड़ित हो रहा होगा और निश्चय ही वह अपनी कुटिया में भी अच्छी तरह सो नहीं पाता होगा॥ 12॥
 
Similarly, the delicate and intelligent Arjuna, who always remains under the command of Dharmaraja Yudhishthira, must be suffering from pain in all his limbs due to anger and certainly he must not be able to sleep well in his hut.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)