Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.236.11: भीमसेन का शरीर वायु और सूर्य के कष्टों को सहन करते-करते अत्यन्त दुर्बल हो गया होगा। क्रोध से उसके अंग-अंग काँप रहे होंगे और धड़क रहे होंगे। वह द्रौपदी के सामने भूमि पर कैसे लेट सकता है? उसका शरीर ऐसे कष्टों को सहन करने में समर्थ नहीं है॥11॥ | mahabharat अध्याय 3.236: पाण्डवोंका समाचार सुनकर धृतराष्ट्रका खेद और चिन्तापूर्ण उद्गार । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कथं नु वातातपकर्शिताङ्गो
वृकोदर: कोपपरिप्लुताङ्ग:।
शेते पृथिव्यामतथोचिताङ्ग:
कृष्णासमक्षं वसुधातलस्थ:॥ ११॥
अनुवाद
भीमसेन का शरीर वायु और सूर्य के कष्टों को सहन करते-करते अत्यन्त दुर्बल हो गया होगा। क्रोध से उसके अंग-अंग काँप रहे होंगे और धड़क रहे होंगे। वह द्रौपदी के सामने भूमि पर कैसे लेट सकता है? उसका शरीर ऐसे कष्टों को सहन करने में समर्थ नहीं है॥11॥
‘Bhimasena's body must have become very weak from enduring the hardships of the wind and the sun. His every limb must be trembling and throbbing with anger. How can he lie down on the ground in front of Draupadi? His body is not capable of enduring such hardships.॥ 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥