Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.234.6: जब तुम अपने प्रियतम के महल के द्वार पर आने की आवाज सुनो, तब उठकर घर के आंगन में आकर उसकी प्रतीक्षा करो। जब तुम देखो कि वह भीतर आ गया है, तब तुरंत आसन और जल से उसका पूजन करो।॥6॥   |   mahabharat अध्याय 3.234: पतिदेवको अनुकूल करनेका उपाय—पतिकी अनन्यभावसे सेवा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 234: पतिदेवको अनुकूल करनेका उपाय—पतिकी अनन्यभावसे सेवा  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.234.6 
श्रुत्वा स्वरं द्वारगतस्य भर्तु:
प्रत्युत्थिता तिष्ठ गृहस्य मध्ये।
दृष्ट्वा प्रविष्टं त्वरिताऽऽसनेन
पाद्येन चैनं प्रतिपूजयस्व॥ ६॥
 
 
अनुवाद
जब तुम अपने प्रियतम के महल के द्वार पर आने की आवाज सुनो, तब उठकर घर के आंगन में आकर उसकी प्रतीक्षा करो। जब तुम देखो कि वह भीतर आ गया है, तब तुरंत आसन और जल से उसका पूजन करो।॥6॥
 
When you hear the voice of your beloved arriving at the palace door, then you should get up and come into the courtyard of the house and wait for him. When you see that he has come inside, then immediately worship him with a seat and water. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)