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mahabharat 3.234.11: जो स्त्रियाँ बहुत उच्च कुल में उत्पन्न हुई हों और पाप कर्मों से दूर रहती हों, उन्हीं से मित्रता करनी चाहिए। जो स्त्रियाँ बहुत क्रोधी हों, सदा नशे में रहने वाली हों, अधिक खाने वाली हों, चोरी करने की आदत वाली हों, दुष्ट हों और चंचल स्वभाव की हों, उनसे दूर ही रहना चाहिए।॥11॥   |   mahabharat अध्याय 3.234: पतिदेवको अनुकूल करनेका उपाय—पतिकी अनन्यभावसे सेवा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 234: पतिदेवको अनुकूल करनेका उपाय—पतिकी अनन्यभावसे सेवा  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.234.11 
महाकुलीनाभिरपापिकाभि:
स्त्रीभि: सतीभिस्तव सख्यमस्तु।
चण्डाश्च शौण्डाश्च महाशनाश्च
चौराश्च दुष्टाश्चपलाश्च वर्ज्या:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जो स्त्रियाँ बहुत उच्च कुल में उत्पन्न हुई हों और पाप कर्मों से दूर रहती हों, उन्हीं से मित्रता करनी चाहिए। जो स्त्रियाँ बहुत क्रोधी हों, सदा नशे में रहने वाली हों, अधिक खाने वाली हों, चोरी करने की आदत वाली हों, दुष्ट हों और चंचल स्वभाव की हों, उनसे दूर ही रहना चाहिए।॥11॥
 
You should make friendship only with chaste women who are born in very high families and stay away from sinful acts. Women who are very short-tempered, always drunk, eat too much, have the habit of stealing, are wicked and of a fickle nature should be shunned from a distance.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)