Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.234.1: द्रौपदी बोली, "सखी! मैं तुम्हें अपने पति का मन आकर्षित करने का एक ऐसा उपाय बता रही हूँ, जिसमें किसी प्रकार के माया-छल के लिए कोई स्थान नहीं है। यदि तुम पहले की भाँति इसी मार्ग पर चलती रहोगी, तो अवश्य ही अपने पति का मन अपनी सहस्त्रियों से हटाकर अपनी ओर आकर्षित कर सकोगी।" | mahabharat अध्याय 3.234: पतिदेवको अनुकूल करनेका उपाय—पतिकी अनन्यभावसे सेवा । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
द्रौपदी बोली, "सखी! मैं तुम्हें अपने पति का मन आकर्षित करने का एक ऐसा उपाय बता रही हूँ, जिसमें किसी प्रकार के माया-छल के लिए कोई स्थान नहीं है। यदि तुम पहले की भाँति इसी मार्ग पर चलती रहोगी, तो अवश्य ही अपने पति का मन अपनी सहस्त्रियों से हटाकर अपनी ओर आकर्षित कर सकोगी।"
Draupadi said, "Friend! I am telling you a way to attract the mind of your husband, in which there is no room for any illusion or deceit. If you continue to walk on this path as before, then you will definitely be able to draw the mind of your husband away from your co-wives and towards you." 1.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥