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श्लोक 3.233.58  |
प्रथमं प्रतिबुध्यामि चरमं संविशामि च।
नित्यकालमहं सत्ये एतत् संवननं मम॥ ५८॥ |
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| अनुवाद |
| सत्ये! मैं प्रतिदिन सबसे पहले उठती और सबसे अंत में सोती थी। पति के प्रति यही भक्ति और सेवा ही मेरा वशीकरण मंत्र है॥ 58॥ |
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| Satye! I used to wake up first and sleep last every day. This devotion and service to my husband is my Vashikaran Mantra.॥ 58॥ |
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