श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 233: द्रौपदीका सत्यभामाको सती स्त्रीके कर्तव्यकी शिक्षा देना  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  3.233.48 
तासां नाम च रूपं च भोजनाच्छादनानि च।
सर्वासामेव वेदाहं कर्म चैव कृताकृतम्॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
मैं उनके नाम, रूप, आहार, वस्त्र आदि सब जानता था। कौन क्या करता था और कौन क्या नहीं करता था? यह भी मुझसे छिपा न था॥48॥
 
‘I knew all their names, forms, food and clothing etc. Who did what and who did not do what? This too was not hidden from me.’॥ 48॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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