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mahabharat 3.233.47: उसके हार और आभूषण बहुमूल्य थे, उसका शरीर अत्यंत सुन्दर चमक रहा था। वह चन्दनमिश्रित जल से स्नान करती, चन्दन का ही श्रृंगार करती, बहुमूल्य रत्न और स्वर्ण के आभूषण धारण करती थी। नृत्य और गान में उसकी कुशलता देखने योग्य थी॥ 47॥   |   mahabharat अध्याय 3.233: द्रौपदीका सत्यभामाको सती स्त्रीके कर्तव्यकी शिक्षा देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 233: द्रौपदीका सत्यभामाको सती स्त्रीके कर्तव्यकी शिक्षा देना  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  3.233.47 
महार्हमाल्याभरणा: सुवर्णाश्चन्दनोक्षिता:।
मणीन् हेम च बिभ्रत्यो नृत्यगीतविशारदा:॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
उसके हार और आभूषण बहुमूल्य थे, उसका शरीर अत्यंत सुन्दर चमक रहा था। वह चन्दनमिश्रित जल से स्नान करती, चन्दन का ही श्रृंगार करती, बहुमूल्य रत्न और स्वर्ण के आभूषण धारण करती थी। नृत्य और गान में उसकी कुशलता देखने योग्य थी॥ 47॥
 
‘Her garlands and ornaments were precious, her body glowed very beautiful. She bathed in water mixed with sandalwood and applied sandalwood as her cosmetics, wore precious stones and gold ornaments. Her skill in the art of dance and song was worth seeing.॥ 47॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)