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श्लोक 3.233.40  |
नित्यमार्यामहं कुन्तीं वीरसूं सत्यवादिनीम्।
स्वयं परिचराम्येतां पानाच्छादनभोजनै:॥ ४०॥ |
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| अनुवाद |
| मैं सदैव वीर माता सत्यवादिनी आर्या कुन्तीदेवी की अन्न, वस्त्र और जल आदि से सेवा करता हूँ ॥40॥ |
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| I always serve the brave mother Satyavadini Arya Kuntidevi with food, clothes and water etc. 40॥ |
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