श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 233: द्रौपदीका सत्यभामाको सती स्त्रीके कर्तव्यकी शिक्षा देना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  3.233.40 
नित्यमार्यामहं कुन्तीं वीरसूं सत्यवादिनीम्।
स्वयं परिचराम्येतां पानाच्छादनभोजनै:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
मैं सदैव वीर माता सत्यवादिनी आर्या कुन्तीदेवी की अन्न, वस्त्र और जल आदि से सेवा करता हूँ ॥40॥
 
I always serve the brave mother Satyavadini Arya Kuntidevi with food, clothes and water etc. 40॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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